जय-जय कराना का क्या अर्थ है? Jay-jay karaana ka kya arth hai?

सवाल: जय-जय कराना का क्या अर्थ है? 

जय-जय कराने से कवि का अपनी कविता में यह तात्पर्य है, कि कवि आज की दुनिया में यह देखता है, कि लोग खुद को कितना बढ़ा चढ़ा कर बताते है। और कवि यह मानता है, कि लोग आजकल बहुत दिखावा करते हैं दिखावे को ही सर्वोच्च मानते हैं, यह सब देखकर कवि को बड़ा दुख होता है। कवि लोगों को एक व्यंग्यात्मक रूप से इंगित कर अपनी कविता में यह बताता है. कि जो नेता लोग हैं, जो सत्ताधारी हैं जो ऊंचे ओहदे वाले लोग हैं, वह खुद को ऊंचा दिखाने के लिए खूद लोगों की भीड़ को इकट्ठा करता है, और उनसे माल्यार्पण करवाता है, और खुद की जय जयकार लगाता है, और फिर इस दौरान खुद को लोगों का विधाता, कर्ता-धर्ता मानते हैं। कहानी के लेखक" रघुवीर सहाय "है, और कविता का नाम "अधिनायक" हैं।

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