दिमागी गुलामी में लेखक ने कौन से विचार उठाए हैं? Dimaagee gulaamee mein lekhak ne kaun se vichaar uthae hain?

सवाल: दिमागी गुलामी में लेखक ने कौन से विचार उठाए हैं?

लेखक के अनुसार दिमागी गुलामी का मतलब है, मानसिक दासता है। व्यक्ति पूर्ण रूप से स्वतंत्र तो हैं, परंतु वह अनौपचारिक रूप से किसी का गुलाम अवश्य है। यह मानसिकता हमें प्रांत बाद क्षेत्रवाद, जातिवाद व राष्ट्रवाद के नाम पर मनुष्य के मन में और मस्तिष्क में जकड़ रखे हैं। अगर हम अपने मन से इस प्रश्न का उत्तर दे तो आज लगभग हर मनुष्य गुलामी दासता से गुजर रहा है, जहां पर यूरोपीय देश में राज किया था, वहां पर आज भी शिक्षा में गुलामी दासता को बताया जाता है, जिसमें के व्यक्ति नौकरी के पीछे रहता है, वह किसी भी तरह से खुद सोचना नहीं चाहता, वह केवल अपनी गलतियों को दूसरों पर थोपने का कार्य करता है। जिस कारण ही मनुष्य जिस परिस्थिति में है, उसको ना माने कर दूसरी परिस्थिति चाहता है, परंतु उसके प्रति वह बदलाव करने का इच्छुक नहीं होता है।

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