लेखक को जेल में समय का ज्ञान कैसे होता था। lekhak ko jel mein samay ka gyaan kaise hota tha.

सवाल; लेखक को जेल में समय का ज्ञान कैसे होता था।

लेखक को जेल में समय का ज्ञान वे चांद को देख कर समय का ज्ञात करते थे, कि कितना समय बाकी है। इस कहानी के लेखक भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु है, उन्होंने यह पुस्तक उन्हें उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान 1944 में अहमदनगर के किले में अपने 5 महीने के कारावास के दिनों में उन्होंने लिखी थी। उन्होंने इस पुस्तक में अनेकों जानकारियां वह बताते हैं, कि उन्होंने किस तरह स्वतंत्रता प्राप्ति के मार्ग पर अनुसरण हुए थे।

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