कवि नरेश सक्सेना को पृथ्वी स्त्री की तरह क्यों लगती है? Kavi naresh saxena ko prithvi stri ki tarah kyu lagti hai

कवि नरेश सक्सेना को पृथ्वी स्त्री की तरह क्यों लगती है?


सवाल: कवि नरेश सक्सेना को पृथ्वी स्त्री की तरह क्यों लगती है?

कवि नरेश सक्सेना के लिए पृथ्वी स्त्री की तरह है क्योंकि वह मानते हैं कि पृथ्वी जीवन का पोषण करती है, ठीक उसी तरह जैसे एक स्त्री अपने परिवार का। पृथ्वी सहनशीलता, उर्वरता, और सृजनात्मकता का प्रतीक है, जो स्त्री के समान है। सक्सेना की कविताओं में पृथ्वी को एक संवेदनशील, देखभाल करने वाली, और सुरक्षित स्थान के रूप में दर्शाया गया है, जो सभी जीवों को समान रूप से प्रेम करती है।

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