यमक अलंकार की परिभाषा लिखिए? Yamak alankar ki paribhasha likhiye


सवाल: यमक अलंकार की परिभाषा लिखिए?

यमक अलंकार हिंदी साहित्य के श्रृंगारिक अलंकारों में से एक है, जिसमें एक ही शब्द का पुनरावृत्ति की जाती है, लेकिन हर बार उसका अर्थ भिन्न होता है। इस अलंकार का प्रयोग कविता या गद्य में भाषा की सौंदर्यता और प्रभाव को बढ़ाने के लिए किया जाता है। उदाहरण के लिए, 'कनक कनक ते सौ गुनी मादकता अधिकाय। या खाए बौरात नर या पा बौराय।' इस पंक्ति में 'कनक' शब्द का पहली बार अर्थ 'सोना' है और दूसरी बार 'धतूरा'। इसी तरह, 'माला फेरत जग गया, फिरा न मन का फेर। कर का मनका डारि दे, मन का मनका फेर।' यहाँ 'मनका' शब्द पहली बार माला के मोती के लिए और दूसरी बार मन की भावनाओं के लिए प्रयोग किया गया है। यमक अलंकार का प्रयोग कवियों द्वारा अपनी रचनाओं में विशेष प्रभाव उत्पन्न करने के लिए किया जाता है।

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